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एक शानदार शख्सियत की मालकिन हैं “इण्डियन हेल्पलाइन” की प्रबंध सम्पादक

Posted On: 17 May, 2014 Celebrity Writer,Entertainment,(1) में

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एक शानदार शख्सियत की मालकिन हैं “इण्डियन हेल्पलाइन” की प्रबंध सम्पादक

वरिष्ठ पत्रकार सुनीता दोहरे ने दिसंबर २०१३ में “इण्डियन हेल्पलाइन” में प्रबंध सम्पादक का कार्य भार संभाल लिया था उनकी कड़ी लगन और मेहनत के चलते आज “इण्डियन हेल्पलाइन” राष्ट्रीय मासिक पत्रिका की दस हजार प्रतियाँ छप रहीं है जो पूरे भारत वर्ष में सप्लाई होतीं हैं लोग उन्हें पढना चाहते हैं
क्योंकि उनकी कलम में ईमानदारी और सच्चाई की मिशाल देखने को मिलती है

“ईएनआई” न्यूज़ में सब एडीटर के पद को रिजाइन देकर कुछ साल पहले इन्होने “चर्दिकला टाइमटीवी” मैं सीनियर सब एडीटर के पद का कार्य भार संभाला था अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पाया कि किसी के अधीन रहकर वे अपनी कलम को बाँध नहीं सकतीं क्योंकि वे अपने वजूद को बरकरार रखते हुए उस उंचाई को छूना चाहती थी जिसे हासिल करने की जदोजहद में उन्हें “चर्दिकला टाइमटीवी” को छोड़ना पड़ा और फिर अभी उन्होंने “इण्डियन हेल्पलाइन” राष्ट्रीय मासिक पत्रिका मैं प्रबंध सम्पादक के पद पर ज्‍वाइन किया है प्रबंधन ने उनको टीम तैयार करने की जिम्‍मेदारी सौपने के साथ ही साथ उन्हें “इण्डियन हेल्पलाइन सोसायटी” का राष्ट्रीय महासचिव भी नियुक्त किया है जिसको बखूबी निभाते हुए इस पत्रिका का प्रकाशन उन्होंने जनवरी २०१४ से शुरू कर दिया था आज मात्र पांच अंकों के निकलने मात्र से ही “इण्डियन हेल्पलाइन” राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ने जो ख्याति प्राप्त की है उसका कोई जोड़ नहीं है दस हजार पत्रिकाओं का प्रकाशन हो रहा है आज अच्छी-अच्छी पत्रिकाओं की इतनी मांग नहीं होती है जितनी मांग इस पत्रिका की हो रही है

पब्लिक की मांग पर इस पत्रिका में एक नहीं दो से तीन लेख या रिपोर्ट सुनीता दोहरे के द्वारा लिखी जातीं हैं क्योंकि पब्लिक खुलकर इनके लेखों और रिपोर्टों को पढ़ती है और मेल, चिठ्ठियों, फोन के द्वारा इनके लेखों की मांग करती है !
अपने कार्यकाल के चलते उन्होंने कई जानी-मानी पत्रिकाओं में और जाने-माने न्यूज़ पेपरों में अपने लेखन की खुशबू बिखेरी है

फेसबुक पर भी अपनी कविताओं, अपनी गजलों और अपनी बेबाक टिप्पड़ी से ये विख्यात रहीं हैं सटीक जवाब देने वाली सुनीता दोहरे को फेसबुक पर जुड़ा हर शख्स उन्हें दीदी कहकर बुलाता है…..
ट्विटर के जरिये वो एकदम बेबाक ट्विट करतीं हैं उनके द्वारा किये हुए ट्विट को पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिलता है
सुनीता दोहरे अपने पत्रकारिता के दौर को बखूबी निभाते हुए अपने विश्वास पर अडिग रहकर पिछले कई दशक से सक्रिय हैं प्रिंट और इलेक्‍टॉनिक दोनों माध्‍यमों पर समान पकड़ रखने वाली सुनीता दोहरे अपनी न्यूज़ एडिटिंग और अपने साफ-सुथरे, बेजोड़ लेखन के जरिये कई न्यूज़ चैनलों में भी लंबी पारी खेल चुकी हैं उनका सबसे पसंदीदा ब्लॉग “जागरण जंक्सन” और “नवभारत टाइम्स” का ब्लॉग है जिसमें वो कभी लिखना नहीं छोडती हैं उन्हें भोपाल से निकलने वाला “लोकजंग” दैनिक समाचार पत्र बेहद प्रिय है जिसमें उन्होंने लगातार इतने बिजी रहने के बावजूद भी लेखनकार्य किया है

हिंदीं-अंग्रेजी समेत गुजराती भाषा पर अच्‍छी पकड़ रखने वाली सुनीता दोहरे को कवितायें, गजल और साहित्यिक लेखन पर भी महारत हासिल है उन्होंने कई हिंदी गाने भी लिखे हैं जो एलबम के रूप में लोगों का मनोरंजन बढ़ा रहे हैं  इनके द्वारा रचित कई उपन्यास जैसे (तेरे वादे पे करके भरोसा, दर्द ही दर्द, जख्मी मांग, अमरबेल का दर्द सुहाना, देवदासियों की पीड़ा) नामक उपन्यास इनकी रैक की शोभा बढ़ा रहे हैं.
सबसे सराहनीय कार्य कि वो जागरण जंक्सन पर कई बार बेस्ट ब्लॉगर बन चुकी हैं नवभारत टाइम्स ब्लॉग मैं भी उनकी पोस्ट हमेशा सुपरहिट रहती है वे पिछले कई सालों से “हवन संस्था”  में एक उच्च पद के साथ जुड़ी हैं और प्रथक बुंदेलखंड की मांग करने वाली बुंदेलखंड की प्रथम महिला है हवन संस्था ने “वीरांगना बुंदेलखंड” रेजीमेंट का गठन किया था और फिर उसका कार्यभार सुनीता दोहरे को केन्द्रीय प्रमुख के रूप मैं सौंप दिया था जिसको उन्होंने बखूबी निभाया है बुंदेलखंड में आज उनके साथ करीब ४००० से ५००० महिलाओं का समर्थन है ख्याति प्राप्ति संस्था ने कई ऐसे एतिहासिक कार्य किये हैं जिनका कोई सानी नहीं है lllllllllllllll हवन संस्था के संस्थापक “साधू सुनील मैसी” भी एक जानी मानी हस्ती है जो आजकल “शिवसेना से लोकसभा प्रत्याशी” हैं उन्होंने झाँसी-ललितपूर से सांसद का चुनाव लड़ा है lllllllllllllllllll
उन दिनों प्रेस क्लब पिपराइच गोरखपुर में ईएनआई न्यूज़ की विशेष संवाददाता माननीय श्री मती सुनीता दोहरे जी विशिष्ठ अथिति के रूप में सम्म्मानित की गई मुझे उन दिनों उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था एक दम सीधी और सरल सबसे हंस कर सहजता से जवाब देने वाली “सुनीता दोहरे” जी को मैं बहुत ही गुस्से वाला समझता था लेकिन मेरे कई सवालों के जवाब उन्होंने इतने सादगी से दिए थे उन दिनों वो बुंदेलखंड के कार्यों को लेकर बेहद बिजी रहतीं थीं इसलिए इस प्रोग्राम में वो थोडा लेट पहुंची थी ज्यादा समय न दे पाने के कारण उनका भाषण सिर्फ १० मिनट का था लेकिन उन दस मिनटों में उन्होंने बहुत कुछ कह दिया था उनके इस भाषण ने मेरी जिन्दगी बदल दी, फिर तो मैं उनके लेखों का उनकी रचनाओं का दीवाना हो गया मैं उनके द्वारा दिए हुए भाषण को आप लोगों के साथ साझा करना चाहूँगा___

माननीय श्री मती सुनीता दोहरे जी ने अपने भाषण में सम्माननीय सांसद श्री आदित्यनाथ योगी जी को और वहाँ पर उपस्थिति सभी पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये कहा कि—देश की राजनीति में प्राचीन भारतीय मूल्यों को संरक्षण प्रदान करने वाले माननीय सांसद श्री आदित्यनाथ योगी जी, मंच पर विराजमान सभी महानुभाव, हमारे मीडिया साथियों व उपस्थित सभी बहिनों और भाइयों को मैं सादर प्रणाम करती हूँ ___

स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद देश की हालात जिस तेजी से बदलने चाहिए थे और आम-जन ने जो उम्मीदें लगा रखीं थी वैसा कुछ नहीं हुआ !
देश में भ्रष्ट नेताओं व अफसरों की साठ-गाँठ ने आम आदमी के दिलों-दिमाग में असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर उसके विश्वास की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी हैं ! आम आदमी न्याय पाने की बात तो छोडो अपनी व्यथा कहने की स्थिती में भी नही है लेकिन बधाई का पात्र है हमारे भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया, जिसने दर-प्रतिदर अपने निर्भीक व बेबाक कार्य प्रणाली के चलते आम-जन के जख्मों को मरहम लगाने का काम किया है और समाचार पत्र व छोटे परदे के माध्यम से आम-जन की बातों को एक आंदोलन का रूप देने का साहसिक व प्रशंसनीय काम किया है !
मैं बधाई देती हूँ अपने मीडिया कर्मियों को जिन्होंने अपने कार्यों से आम-जन पर होने वाले अन्याय व अत्याचारों पर अंकुश लगाने का काम किया है निश्चित ही मीडिया आम-जन के विश्वास का पर्याय बन चुका है ! मैं अपने मीडिया कर्मियों से निवेदन करती हूँ कि हमारे ऊपर आम-जन के विश्वास की रक्षा का भार है और अपनी सृजनकारी भूमिका को पहचानने की जरूरत है।
ज्यादा समय ना लेते हुये मैं अंत में अपने पत्रकार भाइयों के समक्छ कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत करना चाहूँगी जिसे मैंने अपनी पत्रकारिता के दौर में महसूस किया है हमारे पत्रकार भाई जब भी सरकार के विरोध में कोई भी समाचार तैयार करते हैं तो उनके सत्यता से पूर्ण कार्यों में रुकावटें आतीं हैं ! और दिल से ये आवाज आती है—-
“अपने किरदार को जब भी जिया मैंने,
तो जहर तोहमतों का पिया मैंने,
और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा,
जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने”

[उनके इस भाषण ने मेरे दिलो दिमाग पर ऐसा असर छोड़ा कि मुझे लगने लगा कि पत्रकारिता की लाइन में अगर इमानदारी से कार्य किये जाएँ तो बहुतों का भला हो सकता है और मैंने उस दिन कसम खाई कि मैं भी इसी लाइन पर चलते हुए अपने देश हित में कार्य करूँगा ]

माननीय सुनीता दोहरे की इस गजल की चार लाइनें जो उन्होंने अपने दिए हुए भाषण के दौरान कहीं थी जो मुझे बेहद पसंद हैं lllllllll

(मैं अपने अगले लेख में फिर किसी ऐसी ही शख्सियत से मिलवाऊंगा)

आपका
जर्नलिस्ट, अशोक कुमार चौधरी

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